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गर्भाधान के थोड़े ही समय बाद जब निषेचित अंडा गर्भाशय में प्रवेश करता है, तब आपको अपने गर्भवती होने का हल्का अभास हो सकता है। यह सामान्यतः गर्भाधान के 10 दिन के अंदर होता है।
गर्भवती होनें का संकेत आपको पीरियड के एक या दो सप्ताह लेट होने के बाद ही चलता है लेकिन अगर आप मासिक धर्म चक्र का ट्रैक रखना भूल गयी या फिर आप इसका ट्रैक ही नही रख रही है तो सिर्फ पीरियड की अवधि की उम्मीद में गर्भावस्था के लक्षण का पता नही लगा सकती है।

आइए जानतें हैं गर्भवती होनें कुछ अन्य लक्षणों के बारें में ...

1. मन का मिचलाना या उल्टी होना  !




आज भी गाँवों में ज्यादातर गर्भवती महिलाओं की पहचान इस लक्षण के आधारपर की जाती है।

ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को सुबह के समय मिचली या उल्टी की शिकायत होती है लेकिन गर्भावस्था से सम्बन्धित मितली और उल्टी की समस्या सुबह, दोपहर या रात को किसी भी समय हो सकती है।

2. बदन दर्द  !



गर्भवती होनें पर हारमोंस में कुछ परिवर्तन होतें हैं जिसके कारण सिरदर्द और पीठदर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गर्भावस्था में मन भी चंचल हो जाता है और एक काम में मन नही लगता है।

3. खाना खानें में रूचि कम होना  !



गर्भवती होनें पर खाने के प्रति आपकी रूचि पूरी तरह से बदल जाती हैं महिलाओ की रूचि चटपटी चीजो की ओर बढ़ जाती हैं | महिलाओं को कुछ भोजन पसंद नहीं आता और कुछ के लिए आपके मन में लालसा उत्पन्न होती हैं। यह कुछ महिलाओं में काफी जल्दी या शुरुआती दिनों में, यहां तक की माहवारी चूकने से पहले भी हो सकता है।

4. पेट में सूजन होना  !



आपके कपड़े कमर पर सामान्य से तंग लग सकते हैं। यह इसलिए नहीं है कि आपका गर्भाशय बढ़ रहा है, यह फूलापन महज़ हॉर्मोन परिवर्तन के कारण होता है। गर्भावस्था की शुरुआत में शरीर प्रोजेस्टीरोन की जितनी मात्रा उत्पन्न करता है, वह पेट समेत पूरे शरीर की मांसपेशियों के सौम्य उत्तकों को शिथिल कर देता है। यह शिथिलता आपकी पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे पेट का फूलना, डकार, गैस या असहज उत्तेजना पैदा होती है | ये लक्षण विशेषकर ज्यादा भोजन खाने के बाद उत्पन्न होतें हैं |

5. स्तनों में सूजन होना !



गर्भावस्था के छठे हफ्ते के बाद आपके स्तन छूने पर अत्याधिक संवेदनशील लग सकते हैं। यह उसी तरह का अनुभव होता है, जैसे माहवारी शुरु होने से पहले महसूस होता है। आपके स्तन थोड़े बड़े और सूजे हुए लग सकते हैं और त्वचा में से नीली नसें देखी जा सकती हैं। संवेदनशीलता पहली तिमाही में सबसे आम है, और जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती है यह कम होती जाती है।
स्तन जैसे संवेदनशील भाग के वृद्धि का अहसास जल्द महसूस होने लगता है।



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