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आज लड़की की इंगेजमेंट है लड़की का घर फूलो से सजा हुआ है चारो तरफ ख़ुशी का माहौल है।
लड़का इधर दूसरे शहर में बेसुध टहल रहा है
सारे कसमे सारे वादे आज झूठे सिद्ध हो गए। कुसूर तो दोनों का है सबसे बड़ा कसूर है ब्राह्मण, कायस्थ, क्षत्रिय घर में पैदा होना। अलग जात बिरादरी में पैदा होना। दूसरा प्रेम होना। और तीसरा बेरोज़गारी। लड़का खुद को बेरोज़गार और मज़बूर बोल के समझाने की कोशिश करता है पर ये एकबहाना मात्र है
ये वो लड़की है जिसके लिए वो अपने दोस्तों से झगडे कर लेता था।
उसे आज सब याद आरहा है। हर वो दिन जब वो सुबह सोता रहता था और वो आजाती थी बच्चों जैसी मुस्कराहट लिए हुए। जहन्नुम जैसे घर को स्वर्ग बना देती थी।
“तुम्हारा एक भी सामान सही जगह नहीं रहता”
“नहीं यार इधर टाइम नहीं मिल पाया”
“कपड़े सब फेके रहते हो,बर्तन कबसे नहीं धुले?”
“अरे बस अभी सब हो जायेगा तुम बैठो मैं दूध ले आता हूँ”
लड़का दूध और डेरी मिल्क चॉक्लेट लेके आता है और इधर कपडे सरे तह होके आलमारी पे रखे हुए है और वो बर्तन मांज रही है।
“अबे पागल हो का तुम? चलो बैठो ये चॉक्लेट खाओ हम चाय बनाते हैं। ”
“तुम्हे मालूम है न डेरी मिल्क मेरी फेवरेट है”
“नहीं तो इसे तो अपने लिए लाये थे।”
“लो मरो हुँह”
“हा हा हा लव यू”

“(लड़के का पर्स टटोलते हुए) सुनो कुछ पैसे चाहिए..”
“कितने?”
“तुम्हारे पास तो यही 160 ₹ हैं? हमे तो 2000 चाहिए”
“ठीक है परसो लेलेना हो जायेगा”
“ठीक लव यू टू
बात चीत में घंटो बीत गए
“ओये 2 बज गए अब मुझे जाना है कॉलेज की छुट्टी टाइम हो गया है”
“मत जाओ बाबू”
“चल भाग”
“हा हा हा”
“खाना खा लेना बाय
लड़का उसे रिक्शे पे बैठा के घर के लिए लौटता है।
किराने की दुकान पर maggi खरीदने जाता है और पर्स निकालता है
उसकी आँखे नम हो जाती हैं 500 की दो नोट पड़ी रहती है। वो जानती थी के लड़के के पास पैसे नहीं थे…

लेकिन इस दौर को गुज़रे 3 साल हो चुके है। वो स्वर्ग जैसा कमरा। अब तो वो गलिया भी नर्क का रास्ता लगती हैं।
आज लड़के को वो सब याद आरहा है सब।।
कोई गुनगुना रहा था के “सच्चा प्यार हमेसा लड़को को ही क्यों होता हैं ?”

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