नमस्कार दोस्तों , उम्मीद है आप सब अच्छे होंगे | दोस्तों आज हम बात करेंगे प्यार और आकर्षण की ,
जी हाँ दोस्तों , कई बार हम किसी रिलेशनशिप को लेकर बहुत ही असमंजस में रहतें है कि हमें उससे प्यार है या बस हमारा आकर्षण ?
दोस्तों , प्यार और आकर्षण का दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है और ये दोनों चीजे एक-दुसरे के विपरीत है क्योंकि जहाँ प्यार रहेगा वहां आकर्षण की कोई जगह नहीं और जहाँ आकर्षण होता है वहां प्यार की कोई जगह नहीं होती है आईये जानें कि कहाँ प्यार है और कहाँ आकर्षण ?
देखने में अंतर -
दोस्तों , आपकी कोई सुन्दर प्रेमिका है आपको , उसको देखना का तरीका क्या है ?
मतलब अगर आपको उसको देखने पर उत्तेजना महसूस होती है या उसे देखने पर बस आपकी सेक्स करने की इच्छा होती है तो आप ये समझने में देरी न करें कि आपको उससे प्यार नहीं बल्कि आकर्षण है |
और वहीँ अगर वही आपको उसे देखने पर एक सुंदर सी मधुर ख़ुशी होती है और आप उसके साथ बिना किसी स्वार्थ के खुश रहतें है तो आपको उससे बस प्यार है |
दोस्तों , प्यार में व्यक्ति शरीर को न देख कर उसके अंदर भावों की सुन्दरता को महसूस करता है |
निः स्वार्थ पूर्ण -
दोस्तों, प्यार और आकर्षण में सबसे बड़ा अंतर स्वार्थ को लेकर ही है आप किसी भी रिलेशनशिप में अगर किसी स्वार्थ की वजह से हैं और ऐसा स्वार्थ आपको पता भी नहीं चलेगा , ये स्वार्थ आर्थिक हो सकता है , सामाजिक हो सकता है , शारीरिक हो सकता है या किसी भी रूप में हो सकता है , लेकिन स्वार्थ रहेगा जरुर |
और वही दूसरी तरफ प्यार में दूर-दूर तक तक स्वार्थ का कोई नाम नहीं होगा
जैसे - माँ का अपने बेटे से आकर्षण नहीं नहीं बल्कि सच्चा और पवित्र प्यार होता है |
दोस्तों , अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो कृपया हमें कमेंट करके जरुर बताये और अगर आपकी कोई प्रेम कहानी हैं या आपका कोई सुझाव हैं तो बेझिझक हमें ई-मेल करें |
हमारा ई-मेल हैं - yuva.health101@gmail.com
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देखने में अंतर -
दोस्तों , आपकी कोई सुन्दर प्रेमिका है आपको , उसको देखना का तरीका क्या है ?
मतलब अगर आपको उसको देखने पर उत्तेजना महसूस होती है या उसे देखने पर बस आपकी सेक्स करने की इच्छा होती है तो आप ये समझने में देरी न करें कि आपको उससे प्यार नहीं बल्कि आकर्षण है |
और वहीँ अगर वही आपको उसे देखने पर एक सुंदर सी मधुर ख़ुशी होती है और आप उसके साथ बिना किसी स्वार्थ के खुश रहतें है तो आपको उससे बस प्यार है |
दोस्तों , प्यार में व्यक्ति शरीर को न देख कर उसके अंदर भावों की सुन्दरता को महसूस करता है |
निः स्वार्थ पूर्ण -
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और वही दूसरी तरफ प्यार में दूर-दूर तक तक स्वार्थ का कोई नाम नहीं होगा
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