'विश्व स्वास्थ्य संगठन' की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 10 करोड़ से भी ज्यादा महिलाएं 'गर्भनिरोधक गोलियों' का इस्तेमाल करती हैं। विभिन्न अध्यनों के बाद इनके अनेक साइड इफेक्ट्स देखने को मिले हैं। अलग-अलग अध्ययनों के हिसाब से इनके बारे में अलग-अलग धारणाएं हैं।
आइये जानते हैं इनके बारे में।
डेनमार्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार गर्भ निरोधक गोलियों के इस्तेमाल से महिलाओं में 'अवसाद' के होने का खतरा बढ़ता है।
'डेनमार्क' में हुए इस अध्ययन में लगभग 10 लाख महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड्स को शामिल किया गया था। जिनकी उम्र 15 से 40 साल थी। गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से पहले, इन महिलाओं में डिप्रेशन के कोई लक्षण मौजूद नहीं थे।
इस अध्ययन को मीडिया में काफ़ी सनसनीखेज़ बनाकर पेश किया गया. मीडिया में इस ख़बर को लेकर बनी सुर्खियां इस तरह से थीं- 'आप गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो अवसाद की चपेट में आने के लिए तैयार रहें' या फिर 'गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली 70 फ़ीसदी महिलाएं अवसाद की चपेट में'.
हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ़ एबरडीन में प्राइमरी केयर के प्रोफेसर फ़िल हैनाफ़ोर्ड के मुताबिक, गर्भनिरोधक गोलियों का अवसाद से नाता, उतना गंभीर नहीं है, जितना मीडिया में बताया जा रहा है.
वे कहते हैं, "बहुत कम असर होता है." वे विस्तार से बताते हैं कि प्रत्येक 100 महिलाएं जो गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नहीं करती हैं, उनमें हर साल 1.7 महिलाएं अवसाद से पीड़ित हो जाती हैं, वहीं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने वाली प्रति सौ महिलाओं में 2.2 महिलाएं अवसाद की चपेट में आती हैं.
यह कोई बड़ा अंतर नहीं है, हैनफोर्ड के मुताबिक ये अंतर 0.5 का है, यानी प्रत्येक साल 200 महिलाओं में एक महिला ज़्यादा.
गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से केवल अवसाद होने का ख़तरा नहीं होता. इसके इस्तेमाल से ख़ून का थक्का जमने का ख़तरा भी होता है, जो घातक भी हो सकता है.
फैकल्टी ऑफ़ सेक्सुअल एंड रिप्रॉडक्टिव हेल्थकेयर के उप निदेशक डॉ. सारा हार्डमैन कहती हैं, "गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से प्रति दस हज़ार में कुछ महिलाओं की मौत हो जाती है, ये कहना पूरी तरह से सही नहीं है."
सारा कहती हैं, "10 हज़ार महिलाओं में पांच से 12 महिलाओं में ख़ून का थक्का जमने की शिकायत होती हैं और सबकी मौत नहीं होती है, वास्तव थक्का जमने वाली महिलाओं में एक फ़ीसदी महिलाओं की मौत होती है."
सारा के मुताबिक प्रति दस लाख महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों के चलते थक्का जमने से मौत के मामले महज तीन से 10 होती हैं.
दोस्तों , ये जानकारी आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरुर बताएं या आपका कोई सुझाव है तो सादर आमंत्रित हैं और हाँ अगर आपकी कोई सच्ची प्रेम कहानी हैं तो हमें भेजें हम उसे जरुर प्रकाशित करेंगें | हमारा ई-मेल हैं- yuva.health101@gmail.com
आइये जानते हैं इनके बारे में।
डेनमार्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार गर्भ निरोधक गोलियों के इस्तेमाल से महिलाओं में 'अवसाद' के होने का खतरा बढ़ता है।
'डेनमार्क' में हुए इस अध्ययन में लगभग 10 लाख महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड्स को शामिल किया गया था। जिनकी उम्र 15 से 40 साल थी। गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से पहले, इन महिलाओं में डिप्रेशन के कोई लक्षण मौजूद नहीं थे।
इस अध्ययन को मीडिया में काफ़ी सनसनीखेज़ बनाकर पेश किया गया. मीडिया में इस ख़बर को लेकर बनी सुर्खियां इस तरह से थीं- 'आप गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो अवसाद की चपेट में आने के लिए तैयार रहें' या फिर 'गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली 70 फ़ीसदी महिलाएं अवसाद की चपेट में'.
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एक अख़बार की हेडलाइन थी- गर्भनिरोधक गोलियां का अवसाद से नाता, ये स्कैंडल से भी ज़्यादा है.हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ़ एबरडीन में प्राइमरी केयर के प्रोफेसर फ़िल हैनाफ़ोर्ड के मुताबिक, गर्भनिरोधक गोलियों का अवसाद से नाता, उतना गंभीर नहीं है, जितना मीडिया में बताया जा रहा है.
वे कहते हैं, "बहुत कम असर होता है." वे विस्तार से बताते हैं कि प्रत्येक 100 महिलाएं जो गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नहीं करती हैं, उनमें हर साल 1.7 महिलाएं अवसाद से पीड़ित हो जाती हैं, वहीं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने वाली प्रति सौ महिलाओं में 2.2 महिलाएं अवसाद की चपेट में आती हैं.
यह कोई बड़ा अंतर नहीं है, हैनफोर्ड के मुताबिक ये अंतर 0.5 का है, यानी प्रत्येक साल 200 महिलाओं में एक महिला ज़्यादा.
गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से केवल अवसाद होने का ख़तरा नहीं होता. इसके इस्तेमाल से ख़ून का थक्का जमने का ख़तरा भी होता है, जो घातक भी हो सकता है.
फैकल्टी ऑफ़ सेक्सुअल एंड रिप्रॉडक्टिव हेल्थकेयर के उप निदेशक डॉ. सारा हार्डमैन कहती हैं, "गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से प्रति दस हज़ार में कुछ महिलाओं की मौत हो जाती है, ये कहना पूरी तरह से सही नहीं है."
सारा कहती हैं, "10 हज़ार महिलाओं में पांच से 12 महिलाओं में ख़ून का थक्का जमने की शिकायत होती हैं और सबकी मौत नहीं होती है, वास्तव थक्का जमने वाली महिलाओं में एक फ़ीसदी महिलाओं की मौत होती है."
सारा के मुताबिक प्रति दस लाख महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों के चलते थक्का जमने से मौत के मामले महज तीन से 10 होती हैं.
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