नमस्कार मित्रों ! यह ब्लॉग शुरू किये अभी केवल 15 दिन हुए हैं और मैं बताना चाहूँगा कि आप लोगो के सपोर्ट से हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं आप सब बस अपना प्यार देते रहियेगा आपका प्यार ही हमें आगे लिखने के लिए प्रेरित करता रहेगा |
तो मित्रों आज यह साल भी खत्म हो रहा है और अगले कुछ घंटो में हम नए साल का स्वागत कर रहे होंगे पर आज से 6 साल पहले कुछ ऐसा हुआ था जो मैं कभी नहीं भूल सकता | मुझे लगा कि मुझे यह कहानी आप सब से शेयर करनी चाहिए तो ये रहा इस कहानी का पहला भाग |
साल था 2011 और मैं पहली बार कानपूर पहुंचा , यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल चुका था और रही बात मेरी तो मैं तो बहुत ही एक्साइटेड था शुरू के कुछ हफ्ते अजीब थे पर उसके बाद तो मैं पक्का कनपुरिया बन चुका था | न न न आप ये कत्तई मत सोचियेगा कि मैं 'विमल' और 'राजश्री' खाने लगा था अरे भाई कनपुरिया होने का मतलब केवल गुटका चबाना नहीं होता | खैर अब चूँकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो जाहिर सी बात है कि उसके कुछ मित्र होंगे समाज में उठाना बैठना होगा पर 'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है ' नमक लेबल मेरे लिए नहीं था क्यूंकि न किसी से कोई खास दोस्ती थी और न ही उठाना बैठना | हाँ मेरा सारा समय बस मेरे लैपटॉप के साथ बीतता था चूँकि उस समय मैं केवल पढाई ही करना चाहता था पर आगे भगवान् मेरी 'लंका ' लगाने की सारी व्यवस्था कर चुके थे |
मेरे बैच में कितने स्टूडेंट्स थे मुझे यह भी नहीं पता था पर हाँ जब भी किसी को कंप्यूटर या इन्टरनेट से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए होती थी तो मुझसे लोग मदद के लिए पूछते थे | और फिर एक दिन ..............................\
"तुम्हारा नाम देव है न .................."?
"..... हाँ "
"..यार प्राची ने बोला कि तुम सही कर सकते हो | मेरे मेमोरी कार्ड में कुछ प्रॉब्लम हो गई है उसमे मेरी कई सारी फोटो हैं क्या करूँ मैं अब " ?
"ठीक है कल कोशिश करूँगा ...... गारंटी नहीं दे सकता लेकिन कोशिश करूँगा "
"ओके कल क्लास के बाद कैंटीन में "
और फिर कल ट्राई करने पर सभी तो नहीं फिर भी लगभग 90 % फोटोज रिकवर हो चुकी थी |
"वाह ! यार .......... थैंक यू सो मच "
"अरे .. ठीक है यार थैंक यू की कोई जरुरत नहीं "
"अपना नम्बर दो यार ........ अबसे कोई प्रॉब्लम होगी तो मैं क्या करुँगी "
एक दुसरे का नंबर लेने के बाद कहानी आगे बढ़ने लगी |
"हाय ! देव "
"हेल्लो"
"मूवी देखने चलोगे "
"नहीं यार काम है बहुत आज सन्डे है भीड़ बहुत होगी "
"अरे तुम चलो तो मैंने टिकट भी ले ली है "
"अरे यार ..............."
"मैं कुछ नहीं जानती बस अगले 15 मिनट में साउथ एक्स पहुँचों "
और मैंने एक लम्बी साँस छोड़ते हुए कहा
"ठीक है आ रहा ह हूँ......."
वो तीन घंटे जब हम साथ थे. उन तीन घंटों का एक एक सेकंड मुझे आज भी उस तरह याद है जैसे बस कल कि ही बात है और उस फीलिंग को यहाँ लिखना मुमकिन नहीं है | मूवी ख़त्म हुई और वो अपने घर और मैं अपने हॉस्टल वापस चला गया |
उस रात और आने वाली कई रातों तक मुझे नींद नहीं आयी पता नहीं शायद लोग सही कहते हैं कि प्यार में नींद उड़ जाती है | धीरे धीरे दो महीने बीत गए और अगस्त आ चूका था और फिर 2 अगस्त को .......................
"अरे देव .... सुनो "
"हाँ "
"कल तुम्हे मेरे यहाँ आना है "
"क्या ....? क्यूँ "
"बस ऐसे ही मम्मी मिलना चाहती हैं "
अब सही बताऊँ तो मेरी चोक ले चुकी थी यह सुन कर पर न जाता तो भी बवाल होता और अगले दिन दोपहर को मैं उसके घर पर था ......
"नमस्ते ! आंटी"
"नमस्ते बेटा आओ बैठो "
और बातचीत शुरू हुई आंटी ने हँसते हुए कहा .............
"बेटा ये दिन भर बस तुम्हारी बात करती है क्या कर दिया है तुमने "
और ये सुनते ही मैं समझ गया कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी , मैंने भी इस बात को मुस्कुरा के टाल दिया | खैर मैं रात को 10 बजे हॉस्टल पहुंचा (दीवार कूद के जाना पड़ा आप में से जो भी बॉयज हॉस्टल में रहें है वो मेरी बात अच्छे से समझेंगे )|
सितम्बर में मेरा जन्मदिन था और उसकी तरफ से मुझे गिफ्ट में कुछ ऐसा दिया जिसका अहसास आज भी होता है | जन्मदिन की पार्टी एक दोस्त के घर पर हुई जो कि कानपूर का ही था बस 10-11 लोग ही थे उस पार्टी में
पार्टी हो चुकी थी सब वापस जा रहे थे और मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हे छोड़ने चल रहा हूँ रात के 11 बज रहें हैं | सबको विदा करके मैं उसको उसके घर छोड़ने के लिए निकला | वो बाइक के पीछे बैठी थी और उसने मुझसे एक सवाल किया ..............
"देव ! ग्रेजुएशन पूरा हो जायेगा और उसके बाद तुम पता नहीं कानपूर में रहोगे भी या नहीं "
"अरे अभी ढाई साल बचे हैं ग्रेजुएशन पुरे होने में"
"नहीं मैं सोचती हूँ तो टेंशन में आ जाती हूँ "
"अरे ! तुम भी अजीब हो यार मैं यहाँ रहूँ न रहूँ तुम क्यूँ परेशान हो रही ये सोच कर "
वो चुप रही और मुझे लगा कि मैंने कुछ गलत बोल दिया जबकि मैं जानता था वो मुझसे बहुत प्यार करती है भले ही उसने कभी इजहार न किया हो |
"देव .....तुम कैसे हो यार तुम्हे कुछ महसूस नहीं होता न "
"जैसे कि क्या ......"
"जैसे कि तुम्हारा मुहँ तुम गाडी रोको मैं टैक्सी से चली जाउंगी "
"ये कानपूर है मैडम रात के साढ़े ग्यारह बजे आपको कौन सी टैक्सी मिलेगी "
"मैं पैदल चली जाउंगी रोको तुम "
"अरे बस पहुँचने वाले है यार "
और पीछे से उसने मुझे चिकोटी काटी वो भी कुछ ज्यादा ही कस के और ब्रेक अपने आप दब गया , गाड़ी रुक चुकी थी |
"तुम पागल हो क्या .......?"
"हाँ हूँ मैं पागल "
और वो मुझे अकेला छोड़ के पैदल ही जाने लगी | मैं उसके पीछे दौड़ा और उसका हाथ पकड़ लिया
"अरे सुनो तो ... नाराज क्यूँ होती हो "
"मुझे न तुमसे बात ही नही करनी बस जाओ "
"अरे मैंने कुछ गलत बोला हो तो सॉरी "
"क्या सॉरी यार "
"अरे कान पकड़ के सॉरी "
"देव तुम्हे कुछ फील नहीं होता न"
"होता है न "
"क्या ... फील होता है मैं भी तो जानू"
"वो मैं नहीं बता सकता तुम ही बता दो तुम्हे क्या फील होता है "
"बता दूँ ..... पक्का "
"हाँ मैडम बताइए तो "
"सच्ची'............."
और मैंने कहा
"मुच्ची ..... अब बताओ "
"देव मुझे नहीं पता क्या है ये पर इतना जरुर पता है कि जब तुम साथ होते हो तो अच्छा लगता है मैं ये बात सोच के ही टेंशन में आ जाती हूँ कि तुम मेरे साथ नहीं हो मैं कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना "
"अरे मैं कोई तुम्हारा बॉयफ्रेंड थोड़े न हूँ "
और इतना कहना ही था कि उसने अपने लवों को मेरे लवों से लगा दिया और किस करते हुए बोली
"........ तुम हो देव ! आई लव यू एंड आई कांट इवन थिंक टू लिव विथआउट यू "
और मैं निःशब्द वहां खड़ा था मैं बोलना चाहता था पर मेरी जुबान को तो जैसे लकवा मार गया था
"देव ! आई लव यू प्लीज मुझे कभी अकेला मत छोड़ना सोच के भी डर लगता है "
"तुम्हारा तो पता नहीं पर ये बोलने के लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं जानता हूँ बीते कई दिनों से मैं यही बोलना चाहता था आई लव यू यार "
और हम रात के करीब 12 बजे कानपुर के स्वरुप नगर में एक दुसरे कि बाहों में थे | मुझे आज भी उसकी दिल कि धड़कने सुने देती है | कितनी तेजी से हम दोनों के दिल धड़क रहे थे |
मित्रों कहानी यहाँ ख़त्म नहीं हुई है अभी और भी कई किरदार है इस कहानी में जो अगले भाग में आयेंगे |
कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों तक जरुर शेयर कीजियेगा आपका सपोर्ट ही हमारे लिए सब कुछ है और बाकि अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या हमें ईमेल भी कर सकते हैं
yuva.health101@gmail.com पर | बहुत जल्द मिलते हैं कहानी के अगले भाग के साथ |
तो मित्रों आज यह साल भी खत्म हो रहा है और अगले कुछ घंटो में हम नए साल का स्वागत कर रहे होंगे पर आज से 6 साल पहले कुछ ऐसा हुआ था जो मैं कभी नहीं भूल सकता | मुझे लगा कि मुझे यह कहानी आप सब से शेयर करनी चाहिए तो ये रहा इस कहानी का पहला भाग |
साल था 2011 और मैं पहली बार कानपूर पहुंचा , यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल चुका था और रही बात मेरी तो मैं तो बहुत ही एक्साइटेड था शुरू के कुछ हफ्ते अजीब थे पर उसके बाद तो मैं पक्का कनपुरिया बन चुका था | न न न आप ये कत्तई मत सोचियेगा कि मैं 'विमल' और 'राजश्री' खाने लगा था अरे भाई कनपुरिया होने का मतलब केवल गुटका चबाना नहीं होता | खैर अब चूँकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो जाहिर सी बात है कि उसके कुछ मित्र होंगे समाज में उठाना बैठना होगा पर 'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है ' नमक लेबल मेरे लिए नहीं था क्यूंकि न किसी से कोई खास दोस्ती थी और न ही उठाना बैठना | हाँ मेरा सारा समय बस मेरे लैपटॉप के साथ बीतता था चूँकि उस समय मैं केवल पढाई ही करना चाहता था पर आगे भगवान् मेरी 'लंका ' लगाने की सारी व्यवस्था कर चुके थे |
मेरे बैच में कितने स्टूडेंट्स थे मुझे यह भी नहीं पता था पर हाँ जब भी किसी को कंप्यूटर या इन्टरनेट से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए होती थी तो मुझसे लोग मदद के लिए पूछते थे | और फिर एक दिन ..............................\
"तुम्हारा नाम देव है न .................."?
"..... हाँ "
"..यार प्राची ने बोला कि तुम सही कर सकते हो | मेरे मेमोरी कार्ड में कुछ प्रॉब्लम हो गई है उसमे मेरी कई सारी फोटो हैं क्या करूँ मैं अब " ?
"ठीक है कल कोशिश करूँगा ...... गारंटी नहीं दे सकता लेकिन कोशिश करूँगा "
"ओके कल क्लास के बाद कैंटीन में "
और फिर कल ट्राई करने पर सभी तो नहीं फिर भी लगभग 90 % फोटोज रिकवर हो चुकी थी |
"वाह ! यार .......... थैंक यू सो मच "
"अरे .. ठीक है यार थैंक यू की कोई जरुरत नहीं "
"अपना नम्बर दो यार ........ अबसे कोई प्रॉब्लम होगी तो मैं क्या करुँगी "
एक दुसरे का नंबर लेने के बाद कहानी आगे बढ़ने लगी |
"हाय ! देव "
"हेल्लो"
"मूवी देखने चलोगे "
"नहीं यार काम है बहुत आज सन्डे है भीड़ बहुत होगी "
"अरे तुम चलो तो मैंने टिकट भी ले ली है "
"अरे यार ..............."
"मैं कुछ नहीं जानती बस अगले 15 मिनट में साउथ एक्स पहुँचों "
और मैंने एक लम्बी साँस छोड़ते हुए कहा
"ठीक है आ रहा ह हूँ......."
वो तीन घंटे जब हम साथ थे. उन तीन घंटों का एक एक सेकंड मुझे आज भी उस तरह याद है जैसे बस कल कि ही बात है और उस फीलिंग को यहाँ लिखना मुमकिन नहीं है | मूवी ख़त्म हुई और वो अपने घर और मैं अपने हॉस्टल वापस चला गया |
उस रात और आने वाली कई रातों तक मुझे नींद नहीं आयी पता नहीं शायद लोग सही कहते हैं कि प्यार में नींद उड़ जाती है | धीरे धीरे दो महीने बीत गए और अगस्त आ चूका था और फिर 2 अगस्त को .......................
"अरे देव .... सुनो "
"हाँ "
"कल तुम्हे मेरे यहाँ आना है "
"क्या ....? क्यूँ "
"बस ऐसे ही मम्मी मिलना चाहती हैं "
अब सही बताऊँ तो मेरी चोक ले चुकी थी यह सुन कर पर न जाता तो भी बवाल होता और अगले दिन दोपहर को मैं उसके घर पर था ......
"नमस्ते ! आंटी"
"नमस्ते बेटा आओ बैठो "
और बातचीत शुरू हुई आंटी ने हँसते हुए कहा .............
"बेटा ये दिन भर बस तुम्हारी बात करती है क्या कर दिया है तुमने "
और ये सुनते ही मैं समझ गया कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी , मैंने भी इस बात को मुस्कुरा के टाल दिया | खैर मैं रात को 10 बजे हॉस्टल पहुंचा (दीवार कूद के जाना पड़ा आप में से जो भी बॉयज हॉस्टल में रहें है वो मेरी बात अच्छे से समझेंगे )|
सितम्बर में मेरा जन्मदिन था और उसकी तरफ से मुझे गिफ्ट में कुछ ऐसा दिया जिसका अहसास आज भी होता है | जन्मदिन की पार्टी एक दोस्त के घर पर हुई जो कि कानपूर का ही था बस 10-11 लोग ही थे उस पार्टी में
पार्टी हो चुकी थी सब वापस जा रहे थे और मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हे छोड़ने चल रहा हूँ रात के 11 बज रहें हैं | सबको विदा करके मैं उसको उसके घर छोड़ने के लिए निकला | वो बाइक के पीछे बैठी थी और उसने मुझसे एक सवाल किया ..............
"देव ! ग्रेजुएशन पूरा हो जायेगा और उसके बाद तुम पता नहीं कानपूर में रहोगे भी या नहीं "
"अरे अभी ढाई साल बचे हैं ग्रेजुएशन पुरे होने में"
"नहीं मैं सोचती हूँ तो टेंशन में आ जाती हूँ "
"अरे ! तुम भी अजीब हो यार मैं यहाँ रहूँ न रहूँ तुम क्यूँ परेशान हो रही ये सोच कर "
वो चुप रही और मुझे लगा कि मैंने कुछ गलत बोल दिया जबकि मैं जानता था वो मुझसे बहुत प्यार करती है भले ही उसने कभी इजहार न किया हो |
"देव .....तुम कैसे हो यार तुम्हे कुछ महसूस नहीं होता न "
"जैसे कि क्या ......"
"जैसे कि तुम्हारा मुहँ तुम गाडी रोको मैं टैक्सी से चली जाउंगी "
"ये कानपूर है मैडम रात के साढ़े ग्यारह बजे आपको कौन सी टैक्सी मिलेगी "
"मैं पैदल चली जाउंगी रोको तुम "
"अरे बस पहुँचने वाले है यार "
और पीछे से उसने मुझे चिकोटी काटी वो भी कुछ ज्यादा ही कस के और ब्रेक अपने आप दब गया , गाड़ी रुक चुकी थी |
"तुम पागल हो क्या .......?"
"हाँ हूँ मैं पागल "
और वो मुझे अकेला छोड़ के पैदल ही जाने लगी | मैं उसके पीछे दौड़ा और उसका हाथ पकड़ लिया
"अरे सुनो तो ... नाराज क्यूँ होती हो "
"मुझे न तुमसे बात ही नही करनी बस जाओ "
"अरे मैंने कुछ गलत बोला हो तो सॉरी "
"क्या सॉरी यार "
"अरे कान पकड़ के सॉरी "
"देव तुम्हे कुछ फील नहीं होता न"
"होता है न "
"क्या ... फील होता है मैं भी तो जानू"
"वो मैं नहीं बता सकता तुम ही बता दो तुम्हे क्या फील होता है "
"बता दूँ ..... पक्का "
"हाँ मैडम बताइए तो "
"सच्ची'............."
और मैंने कहा
"मुच्ची ..... अब बताओ "
"देव मुझे नहीं पता क्या है ये पर इतना जरुर पता है कि जब तुम साथ होते हो तो अच्छा लगता है मैं ये बात सोच के ही टेंशन में आ जाती हूँ कि तुम मेरे साथ नहीं हो मैं कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना "
"अरे मैं कोई तुम्हारा बॉयफ्रेंड थोड़े न हूँ "
और इतना कहना ही था कि उसने अपने लवों को मेरे लवों से लगा दिया और किस करते हुए बोली
"........ तुम हो देव ! आई लव यू एंड आई कांट इवन थिंक टू लिव विथआउट यू "
और मैं निःशब्द वहां खड़ा था मैं बोलना चाहता था पर मेरी जुबान को तो जैसे लकवा मार गया था
"देव ! आई लव यू प्लीज मुझे कभी अकेला मत छोड़ना सोच के भी डर लगता है "
"तुम्हारा तो पता नहीं पर ये बोलने के लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं जानता हूँ बीते कई दिनों से मैं यही बोलना चाहता था आई लव यू यार "
और हम रात के करीब 12 बजे कानपुर के स्वरुप नगर में एक दुसरे कि बाहों में थे | मुझे आज भी उसकी दिल कि धड़कने सुने देती है | कितनी तेजी से हम दोनों के दिल धड़क रहे थे |
मित्रों कहानी यहाँ ख़त्म नहीं हुई है अभी और भी कई किरदार है इस कहानी में जो अगले भाग में आयेंगे |
कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों तक जरुर शेयर कीजियेगा आपका सपोर्ट ही हमारे लिए सब कुछ है और बाकि अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या हमें ईमेल भी कर सकते हैं
yuva.health101@gmail.com पर | बहुत जल्द मिलते हैं कहानी के अगले भाग के साथ |
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